संपर्क से समृद्धि की ओर ! “Jagruk Yatri Amrit Samvaad”
संपर्क से समृद्धि की ओर : जागरूक यात्री और जागरूक नागरिक की पहल
कभी बचपन में अपने शहर अलीगढ़ में एक बोर्ड पर लिखा देखा था ,
“आपके द्वारा की गई गंदगी, जिसे आप छूना तक नहीं चाहते, उसे आप जैसा ही कोई और व्यक्ति साफ करता है।”
वो एक साधारण सा वाक्य नहीं था, बल्कि ज़िंदगी भर याद रहने वाला सबक था।
उस समय शायद समझ कम थी, पर आज जब जीवन के अनुभव बढ़े हैं, तब उसकी गहराई महसूस होती है।
हाल ही में मुझे कोंकण रेलवे की DRM महोदया से सीधे संवाद करने का अवसर मिला ,
“जागरूक यात्री अमृत संवाद” के अंतर्गत।
यह पहल “अमृत भारत स्टेशन योजना” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य यात्रियों की सीधी भागीदारी से रेलवे स्टेशनों को अधिक स्वच्छ, आधुनिक और सुविधाजनक बनाना है।
इस संवाद का विषय था ,
“संपर्क से समृद्धि की ओर”,
जहाँ यात्रियों के सुझाव और सहभागिता ही विकास का आधार बनते हैं।
हम इस यात्रा पर एक शैक्षणिक टूर पर थे, लेकिन यह मुलाकात मेरे और मेरे विद्यार्थियों के लिए एक अनमोल अनुभव बन गई।
मेरे साथ मेरे कुछ छात्र और सहयोगी शिक्षक भी थे, जो मेरे विचारों और संवेदनशीलता की सराहना कर रहे थे।
DRM महोदया मेरे विचारों और सुझावों से प्रभावित हुईं और उन्होंने मुझे एक टोकन ऑफ लव एंड अप्रिशिएशन भी प्रदान किया।
मेरे विद्यार्थियों ने मेरा पूरा भाषण रिकॉर्ड किया और उस पल को अपने कैमरे में कैद भी किया।
उनकी आँखों में गर्व और उत्साह देख कर मुझे महसूस हुआ कि शिक्षा केवल पुस्तकों में नहीं, व्यवहार और जागरूकता में भी बसती है।
सबसे खुशी की बात यह रही कि मेरे इस वक्तव्य को कोंकण रेलवे के मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया गया।
यह मेरे लिए सम्मान की बात ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणा थी कि
सही सोच और सच्चे भाव कभी व्यर्थ नहीं जाते।
वहीं स्टेशन के हाउसकीपिंग स्टाफ के चेहरे पर जो भाव थे -
वो बताने लायक नहीं, महसूस करने लायक थे।
उनकी आँखों में सम्मान और अपनापन था।
इस घटना का असर इतना गहरा था कि अगले दिन मुझे मेरे संस्थान के हाउसकीपिंग सुपरवाइज़र का थैंक यू नोट मिला।
उन्होंने लिखा ,
“सर, आपने हमारे काम की जो सराहना की और सबको अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया,
वो हमारे लिए बहुत बड़ा सम्मान है।”
उन्होंने यह संदेश इसलिए भेजा क्योंकि उन्होंने मेरा WhatsApp स्टेटस पढ़ा था, जिसमें मैंने यह घटना साझा की थी।
यही तो सच्चा “अमृत संवाद” है , जहाँ एक संवाद से दिल जुड़ते हैं, और समाज में जागरूकता की लहर फैलती है।
हम सभी सफर में स्वच्छ स्टेशन, सुलभ शौचालय, साफ प्रतीक्षालय और सुखद वातावरण की उम्मीद करते हैं,
पर क्या हमने कभी सोचा कि उस स्वच्छता को बनाए रखना केवल सरकार या कर्मचारियों का नहीं,
बल्कि हम सबका कर्तव्य है?
जो कचरा हम फेंकते हैं, जो पान की पीक हम सड़क पर छोड़ते हैं,
वो केवल सफाईकर्मी का नहीं, पूरे समाज का अपमान है।
सच्ची सभ्यता वहीं से शुरू होती है जहाँ व्यक्ति अपने परिवेश के प्रति संवेदनशील होता है।
कोंकण रेलवे की “अमृत संवाद” पहल हमें यही याद दिलाती है कि,
सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि जिम्मेदार यात्रा।
सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि सुझाव और सहयोग।
यदि हम सभी अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाएँ ,
तो न केवल स्टेशन, बल्कि पूरा देश स्वच्छ और समृद्ध बन सकता है।
लेखक का संदेश
आइए “जागरूक यात्री” बनें,
क्योंकि जागरूकता ही अमृत है,
और संपर्क से ही समृद्धि की राह बनती है।
English Summary
During our educational tour, I had the privilege of interacting with the DRM of Konkan Railway under the “Jagruk Yatri Amrit Samvaad” initiative, part of the Amrit Bharat Station Scheme.
My reflections on civic awareness and dignity of cleanliness were appreciated by the DRM ma’am, my students, and the housekeeping staff.
This meaningful interaction reminded me of a message from my childhood in Aligarh ,
“The dirt you throw away is cleaned by someone just like you.”
True progress begins with awareness, empathy, and respect for every individual who contributes to society.
From the Desk of Rakesh Kushwaha
Educator | Writer | Founder – Mathivation Hub
“Mathivation Hub — where math meets humanity.”

जो मुद्दा आपने उठाया बैठने की सीटों का वह बहुत ही जरूरी था। आप का सुझाव उनके स्टेशन के दिए गए जगह का सही उपयोग करने में मदद करेंगे। आप का ऑब्जर्वेशन स्किल भी बहुत अच्छा है
ReplyDeleteThank you for your kind words 🙏🏻
ReplyDeleteMarvelous
ReplyDeleteThank you so much 🙏🏻
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