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जब राम लौटे, तब पूजन लक्ष्मी-गणेश का क्यों?

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  दिवाली पर हम लक्ष्मी और गणेश की पूजा क्यों करते हैं — श्री राम की नहीं ? भारतीय संस्कृति में प्रत्येक उत्सव केवल उल्लास नहीं, अपितु एक तत्वचिंतन है। दीपावली का पर्व उसी तत्वचिंतन का उज्ज्वल प्रतीक है — जहाँ दीप का प्रकाश केवल बाह्य जगत को नहीं, अपितु अंतःकरण के अंधकार को भी दूर करता है। यह प्रश्न अनेक भक्तों के हृदय में उद्भवित होता है — “जब दीपावली श्रीराम के अयोध्या आगमन की स्मृति है, तब इस रात्रि में पूजन श्रीलक्ष्मी और श्रीगणेश का क्यों?” इस प्रश्न का उत्तर धर्म के सूक्ष्म दर्शन में निहित है — जहाँ लक्ष्मी समृद्धि की ऊर्जा हैं, गणेश विवेक के अधिष्ठाता, और राम धर्म के प्रकाशस्वरूप। दीपावली का सच्चा संदेश इसी त्रिवेणी में समाहित है — कि धन विवेक के साथ, और धर्म करुणा के साथ ही मंगलकारी होता है। लेखक दृष्टिकोण : दीपावली केवल उत्सव नहीं, एक दार्शनिक प्रतीक है — प्रकाश का अंधकार पर, विवेक का अज्ञान पर, और मर्यादा का अधर्म पर विजय का प्रतीक। फिर भी, यह प्रश्न अनादि काल से जिज्ञासु हृदयों में उठता रहा है — “जब यह पर्व श्रीराम के अयोध्या आगमन की स्मृति में मनाया जाता है, तब उस रात्रि...