तत्काल बॉस-सीनियर का सम्मान करें !

तत्काल बॉस-सीनियर का सम्मान करें !

ज़िंदगी से सीखे कुछ असली सबक



Disclaimer

इस ब्लॉग में साझा की गई सभी घटनाएँ, सीख और उदाहरण केवल समझ-बूझ बढ़ाने और सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से लिखे गए हैं।

इनका किसी व्यक्ति, संस्था, संगठन या पद से सीधा संबंध नहीं है।

किसी भी घटना का उल्लेख केवल अनुभव पर आधारित है, न कि आलोचना, दोषारोपण या तुलना के लिए।


कुछ असली सबक

हम सब अपनी नौकरी या पेशे में रोज़ कई लोगों से मिलते हैं।

लेकिन एक बात हमेशा याद रखिए —

आपका सबसे ज़रूरी व्यक्ति होता है आपका “तत्काल बॉस।”

क्यों?

क्योंकि वही आपकी रिपोर्ट आगे ले जाता है।

वही आपके काम, स्वभाव और मेहनत की पहली छाप बनाता है।

और ज़्यादातर फैसले, उसी की राय पर टिका करते हैं।

अक्सर लोग गुस्से, अहंकार या छोटी-सी बात में अपने सीनियर से उलझ जाते हैं।

फिर बाद में पछताते हैं।


आज मैं कुछ सच्ची घटनाएँ साझा कर रहा हूँ, जो बताते हैं कि थोड़ी-सी समझदारी कई परेशानियाँ बचा सकती है।


1. ट्रेन में मिली सीख

मेरे एक रिश्तेदार ने बताया कि उनके सहकर्मी ने एक बार लोकल ट्रेन में अपने बॉस को देखकर अनदेखा कर दिया।

न “गुड मॉर्निंग”, न सीट देने की पेशकश।

उसी दिन शाम को, उसके हाथ में सबसे मुश्किल काम दे दिया गया।

कभी-कभी चुप इशारे भी बहुत कुछ कह जाते हैं।


2. कुत्ता निकालने वाली घटना

एक सरकारी दफ्तर में अफसर ने स्टाफ से कहा कि बाहर से आया कुत्ता निकाल दो।

वो मज़ाक के अंदाज़ में बोला,

“काट लिया तो?”

बस… बात चढ़ गई।

कुछ ही हफ्तों में उसका ट्रांसफर दूर जगह पर हो गया।

काम की जगह पर मज़ाक भी सोच-समझकर करना पड़ता है।


3. दोस्त का दिल्ली से छपरा ट्रांसफर

मेरे एक करीबी मित्र, पूरी ईमानदारी से काम करते थे।

लेकिन एक प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में नहीं झुके।

नतीजा — कुछ ही दिनों में ट्रांसफर दिल्ली से छपरा

सच्चाई की कीमत होती है —

पर सम्मान हमेशा दिल में रहता है।


4. स्कूल की अपनी राजनीति

स्कूलों में यह अक्सर देखा जाता है कि

सीनियर या कोऑर्डिनेटर से अनबन हो जाए तो

more blocks, lower grades, या extra duty मिल जाती है।

कभी-कभी तो सिर्फ “गुड मॉर्निंग” न बोलना भी

लोग याद रख लेते हैं।

दफ्तर का माहौल बहुत कुछ सिखाता है।


क्या सीख मिलती है?

  • धीरे बोलिए, समझदारी से बोलिए।
  • अहंकार को अपना spokesperson मत बनने दीजिए।
  • Immediate boss आपका पहला support system होता है — असली या मजबूरी वाला, लेकिन होता ज़रूर है।
  • Respect देने से आपका ही सम्मान बढ़ता है।
  • एक छोटा-सा gesture आपकी पूरी image बदल सकता है।

अंत में एक बात…

ज़िंदगी ने मुझे इतना सिखाया है कि

हर जगह — चाहे स्कूल हो, दफ्तर हो या ट्रेन —

थोड़ा सम्मान, थोड़ी विनम्रता, और थोड़ी समझदारी

बहुत लम्बा रास्ता तय कराती है।


– आपका

Rakesh Kushwaha

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